अमित शाह का बड़ा बयान: ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को किया उजागर।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 22 मई को दिल्ली में आयोजित 22वें बीएसएफ अलंकरण समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों की बहादुरी, देशभक्ति और समर्पण को सलाम करते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कही। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा कर रही BSF भारत की सुरक्षा का मजबूत स्तंभ है।
ऑपरेशन सिंदूर बना आतंक के खिलाफ निर्णायक पल, अमित शाह
अमित शाह ने अपने भाषण में हाल ही में भारत द्वारा किए गए “ऑपरेशन सिंदूर” की चर्चा करते हुए कहा कि इसने साफ कर दिया है कि भारत अब आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि पहलगाम हमले के जवाब में भारत की सेना ने जो कार्रवाई की, वह बेहद सटीक और निर्णायक थी। इससे न सिर्फ आतंकियों को करारा जवाब मिला बल्कि पाकिस्तान को भी साफ संदेश गया।
पहलगाम में निर्दोषों की नृशंस हत्या
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले में आतंकियों ने चुनिंदा निर्दोष नागरिकों को उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाया। उन्होंने निर्दोषों को उनके परिवारों के सामने मार डाला। शाह ने कहा कि इस बर्बर हमले ने दुनिया के सामने यह स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान अब भी आतंकवाद का पालन-पोषण कर रहा है।
भारत की जवाबी कार्रवाई में ध्वस्त हुए 9 आतंकी शिविर
अमित शाह ने कहा कि भारत ने इस हमले का सटीक जवाब देते हुए पाकिस्तान में 100 किलोमीटर भीतर घुसकर नौ आतंकी शिविरों को कुछ ही मिनटों में तबाह कर दिया। यह कार्रवाई भारतीय सशस्त्र बलों की कुशलता, समन्वय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रमाण है।
केवल आतंकियों को बनाया गया निशाना
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत ने केवल आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की और किसी भी पाकिस्तानी नागरिक ठिकाने या आम जनता को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। भारत ने अंतरराष्ट्रीय नियमों और मर्यादाओं का पालन करते हुए केवल आतंकी शिविरों को निशाना बनाया।
पाकिस्तानी सेना ने इसे अपने ऊपर हमला माना
शाह ने बताया कि भारत की इस कार्रवाई को पाकिस्तानी सेना ने अपने ऊपर हमला माना, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वहां की सेना आतंकियों के साथ खड़ी है। लेकिन भारत ने अपना फोकस आतंकवाद पर बनाए रखा और जनसंहार से पूरी तरह बचा।
BSF की वीरता की दुनिया में मिसाल
गृहमंत्री ने बीएसएफ जवानों की वीरता का जिक्र करते हुए 1971 के भारत-पाक युद्ध की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि बीएसएफ ने उस समय न केवल देश की रक्षा की, बल्कि बांग्लादेश के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बांग्लादेश को भी याद दिलाया कि उन्हें भारत और बीएसएफ के इस योगदान को नहीं भूलना चाहिए।
बांग्लादेश को कड़ा संदेश: इतिहास मत भूलो
अमित शाह ने बांग्लादेश को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि बीएसएफ ने 1971 में जो भूमिका निभाई थी, वह सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि मानवता के पक्ष में एक ऐतिहासिक कदम था। उन्होंने कहा कि बीएसएफ के योगदान को भारत भी नहीं भूला है और बांग्लादेश को भी नहीं भूलना चाहिए।
बीएसएफ: सीमाओं का रक्षक, देश का गौरव
गृहमंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) के 2.75 लाख जवान भारत की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बीएसएफ देश की 6000 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमाओं की रक्षा करता है, जिनमें पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमाएं प्रमुख हैं। बीएसएफ का गठन 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के बाद हुआ था।
बीएसएफ का गौरवशाली इतिहास और वर्तमान भूमिका
बीएसएफ के पहले महानिदेशक के एफ रुस्तमजी थे, जिन्होंने इस बल को एक मजबूत और अनुशासित फोर्स के रूप में स्थापित किया। आज बीएसएफ आधुनिक तकनीक, सतर्कता और देशभक्ति के साथ सीमाओं की निगरानी कर रहा है। देश की सुरक्षा के लिए इस बल की भूमिका अमूल्य और सम्मानजनक है।
भारत आतंकवाद को अब बर्दाश्त नहीं करेगा
अंत में अमित शाह ने कहा कि भारत अब सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि आतंक को जड़ से खत्म करने की नीति पर काम कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर इसका उदाहरण है कि अब भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में निर्णायक और आत्मनिर्भर सुरक्षा नीति अपना चुका है।
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