जन्माष्टमी आज मनाई जाएगी या कल, पढे समाचारों के अनुसार कब हे ओर क्या हे शुभ महूरत।
जन्माष्टमी हर वर्ष भारत मे धूम धाम से मनाई जाती हे, इस पर्व का नाम पूरा नाम श्री कृषण जन्म अष्टमी हे। हिन्दू धर्म के अनुसार राक्षस कंस ने हिन्दू धर्म मानने वाले लोगों पर अत्याचार किए, उसको भ्रम हो गया था की वह भगवान हे ओर सब को केवल उसकी पूजा करनी चाहिए। हिन्दू धर्म के लोगो ने तपस्या ओर योग द्वारा ईश्वर से प्रथना करी की इस पापी अधर्मी जीव से उनकी रक्षा की जाए तो ईश्वर ने अवतार ले कर श्री कृषण रूप मे जन्म लिया ओर पापी कंस का संहार किया।
जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्री कृषण द्वारा धरती पर जन्म लेने कि याद मे मनाया जाता हे।
भारत मे इस पर्व का नाम आम तोर पर जन्माष्टमी हे ओर शुद्ध हिन्दी भाषा मे श्री कृषण जन्म अष्टमी हे, हिन्दू धर्म के ज्योतिषियों, शास्त्रियों आचार्यों ओर शंकरचार्यों के अनुसार प्रति वर्ष वह समय आता हे ग्रह नक्षत्रों की सीतिथि फिर से वेसि ही बनती हे जब भगवान श्री कृषण ने इस धरती पर एक आम मनुष्य के रूप मे जन्म लिया था। यह केवल धार्मिक विचारधारा की बात नहीं हे यह तो विज्ञान के प्रकार की बात हे, एक एसा समय जब आकाश से लेकर पृथ्वी तक ग्रेहों का ओर नक्षत्रों का , रात्री ओर दिन का, वायू ओर गति का परिवर्तन होना, वर्ष का सबसे अधिक गर्म दिन होना, कोई आम बात नहीं हे यह ईश्वर का ही चमत्कार हे।
भारत के प्रसिद्ध समाचार पत्र क्या लिखते हें जन्माष्टमी के पर्व का सही दिन।
मे भारत के प्रसिद्ध हिन्दी समाचार पत्र जसे दैनिक जागरण , दैनिक भसकर ओर अमर उजाला ओर कुछ वैबसाइट से जानकारी खंगाल कर तभी समाचार आप तक पाहुचता हूँ अधिकाश ने लिखा हे की 6 सितम्बर को ही जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा केवल वेष्णव संप्रदाय ओर साधू सन्यासी 7 सितम्बर को श्री कृषण जन्म अष्टमी मनाएंगे। यह देखा गया हे कि बहुत बार अष्टमी दो बार पड़ती हे ओर इस पर्व को दो दिन मनाया जाता हे।
सुबह से रात्री बारह बजे तक ही जन्माष्टमी का व्रत रखना चाहिए।
जन्माष्टमी के दिन कई स्थानो पर देखा गया हे कि एक सुबह से अगली सुबह तक व्रत रखा जाता हे, रात्री मे केवल फलाहार किया जाता हे ओर जनम के समय के बाद भी पूजा ओर भजन जारी रेहता हे ओर सुबह पर्व कि अंतिम पूजा के बाद अन्न ग्रहण किया जाता हे। व्रत रखने का सही समय सुबह जागने के बाद रात्री बारह बजे तक होता हे उसके बाद पूजा पाठ कर अन्न ओर सब ग्रहण किया जा सकता हे, फिर भी जकी रही भावना जेसी वाली बात हे।
सव व्रतों से सरल हे जन्माष्टमी का व्रत।
व्रत कई प्रकार के हें परन्तु यह व्रत सरल हे क्योंकि केवल अन्न नहीं ग्रहण करना हे बाकी पानी दूध फल ग्रहण किया जा सकता हे, इस व्रत के विपरीत शिव रात्री व्रत मे जल भी निषेध हे। भारत मे कई प्रकार के व्रत रखे जाते हें परन्तु सबसे सरल व्रत जन्माष्टमी का व्रत हे। जिस प्रकार नवरात्रियों मे कन्या का पूजन होता हे वेसे ही इस मे बालकों कि पूजा कि जाती हे।
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