delhidopeharnews.com ब्यूरो: गुरुग्राम में सीवेज प्रबंधन की बदहाली एक बार फिर उजागर हुई है। एक तरफ प्रशासन शहर की सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को 977 MLD तक बढ़ाने की बड़ी योजनाएं बना रहा है, वहीं दूसरी ओर कैग (CAG) की रिपोर्ट ने शहर के मौजूदा बुनियादी ढांचे की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में 63 MLD सीवेज बिना किसी ट्रीटमेंट के ही सीधे नालों और पर्यावरण में बहाया जा रहा है।
कैग की रिपोर्ट में क्या है बड़ा खुलासा?
कैग की ऑडिट रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि गुरुग्राम में सीवेज नेटवर्क का जाल बिछाने में बड़ी खामियां हैं। शहर में एसटीपी (STP) की क्षमता बढ़ाने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि मौजूदा नेटवर्क ही सीवेज को सही तरीके से ट्रीटमेंट प्लांट तक नहीं पहुंचा पा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, शहर के कई इलाकों में सीवर लाइनें या तो अधूरी हैं या फिर वे सही तरीके से एसटीपी से जुड़ी ही नहीं हैं।
विशेषज्ञों की राय: सिर्फ प्लांट लगाने से नहीं होगा समाधान
पर्यावरण विशेषज्ञों और शहरी नियोजन जानकारों का मानना है कि केवल नए एसटीपी बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक सीवेज को प्लांट तक ले जाने के लिए मजबूत और सुव्यवस्थित पाइपलाइन नेटवर्क नहीं होगा, तब तक करोड़ों का निवेश बेकार साबित होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि गुरुग्राम का सीवेज नेटवर्क दशकों पुराना और ओवरलोडेड है। यदि सीवेज को एसटीपी तक लाने के लिए ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ पर ध्यान नहीं दिया गया, तो 977 MLD की क्षमता भी कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।
प्रमुख बिंदु और चुनौतियां
- 63 MLD सीवेज का सीधा बहाव भूजल और स्थानीय जल निकायों को प्रदूषित कर रहा है।
- सीवर नेटवर्क की मैपिंग में भारी विसंगतियां पाई गई हैं।
- प्रशासन की नई योजनाओं में सीवेज कलेक्शन नेटवर्क के विस्तार पर कम ध्यान दिया गया है।
- बढ़ते शहरीकरण के कारण मौजूदा पाइपलाइनें दबाव झेलने में असमर्थ हैं।
फिलहाल, स्थानीय प्रशासन पर इस रिपोर्ट के बाद दबाव बढ़ गया है। नागरिकों का कहना है कि शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं की यह स्थिति चिंताजनक है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस रिपोर्ट के बाद सीवेज नेटवर्क को दुरुस्त करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।