Delhidopeharnews ब्यूरो: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) अब अपने प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। बोर्ड का मुख्य उद्देश्य ओम्बड्समैन (लोकपाल) के अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट करना है, ताकि राज्य स्तरीय विवादों और बीसीसीआई के केंद्रीय मामलों के बीच एक स्पष्ट लक्ष्मण रेखा खींची जा सके।
राज्य संघों की बढ़ेगी जवाबदेही
सूत्रों के अनुसार, बीसीसीआई का मानना है कि वर्तमान में कई ऐसे मामले सीधे ओम्बड्समैन के पास पहुंच रहे हैं, जिन्हें संबंधित राज्य क्रिकेट संघों के आंतरिक स्तर पर ही सुलझाया जाना चाहिए। इस नई पहल के तहत, अब यह अनिवार्य किया जा सकता है कि शिकायतकर्ता पहले अपने राज्य संघ की शिकायत निवारण समिति के पास जाएं।
बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘हमारा लक्ष्य ओम्बड्समैन की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाना है। हर छोटी-मोटी समस्या के लिए शीर्ष स्तर पर हस्तक्षेप करने के बजाय, राज्य संघों को अपनी जिम्मेदारी खुद लेनी होगी।’
क्या होंगे मुख्य बदलाव?
- राज्य स्तरीय विवादों के लिए पहले स्थानीय स्तर पर समाधान की प्रक्रिया अनिवार्य होगी।
- ओम्बड्समैन केवल उन्हीं मामलों में हस्तक्षेप करेंगे जो बीसीसीआई के संविधान के तहत नीतिगत या गंभीर उल्लंघन से जुड़े होंगे।
- राज्य संघों के लिए अपनी आंतरिक शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाना जरूरी होगा।
प्रशासनिक सुधारों की दिशा में कदम
यह कदम बीसीसीआई द्वारा क्रिकेट प्रशासन में सुधार लाने की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। बोर्ड का मानना है कि इस स्पष्टता से न केवल ओम्बड्समैन का कार्यभार कम होगा, बल्कि राज्य संघों में भी जवाबदेही और अनुशासन बढ़ेगा। आने वाले दिनों में बीसीसीआई इस संबंध में एक विस्तृत गाइडलाइन जारी कर सकता है, जो सभी राज्य इकाइयों के लिए बाध्यकारी होगी।