सुप्रीम कोर्ट का मानवीय फैसला: फर्जी एसटी सर्टिफिकेट वाले इंजीनियर को भी मिलेगी पेंशन, जानें क्या है पूरा मामला

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सुप्रीम कोर्ट का मानवीय फैसला: फर्जी एसटी सर्टिफिकेट वाले इंजीनियर को भी मिलेगी पेंशन, जानें क्या है पूरा मामला
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delhidopeharnews.com ब्यूरो: सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मुंबई के एक सेवानिवृत्त इंजीनियर के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। मामला एक ऐसे इंजीनियर से जुड़ा है जिसने अनुसूचित जनजाति (ST) का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरी हासिल की थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने लंबी सेवा अवधि और सेवानिवृत्ति के बाद की स्थिति को देखते हुए उन्हें पेंशन का लाभ देने का आदेश दिया है।

मामले की पूरी जानकारी

यह मामला मुंबई के एक सरकारी विभाग में कार्यरत इंजीनियर से जुड़ा है। आरोप था कि संबंधित व्यक्ति ने अनुसूचित जनजाति का फर्जी जाति प्रमाण पत्र पेश कर नौकरी प्राप्त की थी। जांच में प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने के बाद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए उनकी बर्खास्तगी को सही ठहराया था। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई की।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और आदेश

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्वीकार किया कि फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाना एक गंभीर अपराध है, लेकिन साथ ही उन्होंने इंजीनियर द्वारा की गई दशकों की सेवा को भी नजरअंदाज नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि व्यक्ति ने लंबे समय तक विभाग में अपनी सेवाएं दी हैं, इसलिए उन्हें पूरी तरह से खाली हाथ नहीं छोड़ा जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यद्यपि नियुक्ति गलत आधार पर थी, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद एक व्यक्ति को उसके जीवन यापन के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। सेवा की अवधि को देखते हुए पेंशन का भुगतान मानवीय आधार पर किया जाना चाहिए।

फैसले के मुख्य बिंदु

  • इंजीनियर ने दशकों तक विभाग में अपनी सेवाएं दी थीं।
  • फर्जी जाति प्रमाण पत्र के कारण सेवा से बर्खास्तगी को कोर्ट ने बरकरार रखा।
  • कोर्ट ने मानवीय आधार पर पेंशन का लाभ देने का आदेश दिया।
  • यह फैसला उन मामलों में एक नजीर बनेगा जहां कर्मचारी ने लंबी सेवा दी है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कानून के सख्त प्रावधानों और मानवीय संवेदनाओं के बीच एक संतुलन बनाने का प्रयास है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि हालांकि गलत तरीके से नौकरी पाना दंडनीय है, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा के अधिकार को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता।

मेरा परिचय।


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