delhidopeharnews.com ब्यूरो: राजधानी जयपुर में कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, वे अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ते जा रहे हैं। शहर के अधिकांश थानों में सब-इंस्पेक्टरों (SI) के रिक्त पदों के कारण पुलिसिंग की कार्यक्षमता पर सीधा असर पड़ रहा है। आलम यह है कि एक-एक अधिकारी को कई थानों का अतिरिक्त कार्यभार संभालना पड़ रहा है, जिससे न केवल जांच में देरी हो रही है, बल्कि आम जनता की शिकायतों का निपटारा भी समय पर नहीं हो पा रहा है।
स्टाफ की कमी से बढ़ रहा पेंडिंग केसों का बोझ
जयपुर पुलिस आयुक्तालय के अंतर्गत आने वाले कई थानों में सब-इंस्पेक्टरों की भारी कमी देखी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, पदोन्नति और सेवानिवृत्ति के बाद से खाली हुए पदों को भरने की प्रक्रिया धीमी होने के कारण यह संकट गहरा गया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब एक सब-इंस्पेक्टर पर तीन-चार मामलों की जांच का बोझ होता है, तो स्वाभाविक रूप से केस डायरी तैयार करने और साक्ष्य जुटाने में देरी होती है।
पुलिस महकमे के एक आला अधिकारी का कहना है, ‘स्टाफ की कमी एक बड़ी चुनौती है। हम सीमित संसाधनों के बावजूद अपराध नियंत्रण के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं, लेकिन रिक्त पदों को जल्द भरा जाना अनिवार्य है ताकि फील्ड पर काम करने वाले जवानों का मनोबल बना रहे।’
आम जनता पर क्या पड़ रहा असर?
- एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच की गति धीमी हो गई है।
- सब-इंस्पेक्टरों की अनुपलब्धता के कारण फरियादियों को बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
- गंभीर अपराधों की विवेचना में तकनीकी विशेषज्ञता की कमी महसूस की जा रही है।
- बीट पुलिसिंग और गश्त व्यवस्था पर भी इसका सीधा असर पड़ा है।
आगे की राह और चुनौतियां
जयपुर में बढ़ते शहरीकरण और अपराधों की बदलती प्रकृति को देखते हुए पुलिस बल में रिक्तियों को भरना अब प्राथमिकता बन गया है। जानकारों का मानना है कि यदि जल्द ही नई नियुक्तियां नहीं की गईं, तो शहर की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है। फिलहाल, उच्च अधिकारियों द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अन्य विभागों से अधिकारियों को थानों में तैनात करने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन यह केवल एक अस्थायी समाधान ही साबित होगा।