इजरायली सेना ने ‘फ्रीडम फ्लोटिला’ के जहाज मैडलीन को किया जब्त।
इजरायल की नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में उस जहाज को जब्त कर लिया है जो गाजा पट्टी में मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए रवाना हुआ था। यह जहाज ‘फ्रीडम फ्लोटिला कोएलिशन’ (FFC) द्वारा संचालित किया जा रहा था और इसमें जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग सहित 12 एक्टिविस्ट सवार थे।
मैडलीन जहाज पर थे अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ता
‘मैडलीन’ नाम की यह नौका ब्रिटिश झंडे के नीचे पंजीकृत है। इस पर सवार कार्यकर्ताओं में विभिन्न देशों के मानवाधिकार कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता और यूरोपीय संसद की सदस्य रीमा हसन भी शामिल हैं। उनका उद्देश्य था—गाजा में घिरे लोगों तक खाद्य, दवाएं और अन्य मानवीय सहायता पहुंचाना।
रीमा हसन ने दी गिरफ्तारी की जानकारी
रीमा हसन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक फोटो साझा की है। इसमें सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनकर बैठे और अपने हाथ ऊपर उठाए हुए देखा जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि इजरायली सेना ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में करीब रात 2 बजे इस जहाज को घेर लिया और सभी को हिरासत में ले लिया।
एफएफसी ने लगाया ‘अपहरण’ का आरोप
मानवीय संगठनों के समूह फ्रीडम फ्लोटिला कोएलिशन (FFC) ने टेलीग्राम पर बताया कि ‘मैडलीन’ जहाज से अब कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। FFC ने इसे “अपहरण” की संज्ञा दी है और कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन है।
ग्रेटा थनबर्ग के शामिल होने से बढ़ी चर्चा
स्वीडिश पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग की इस मिशन में भागीदारी के चलते यह अभियान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संस्थाओं की नजर में था। थनबर्ग ने पहले भी फिलिस्तीन के समर्थन में बयान दिए हैं और गाजा में मानवीय संकट को लेकर कई बार आवाज उठाई है।
इजरायल की कार्रवाई पर उठे अंतरराष्ट्रीय सवाल
इजरायली सेना द्वारा अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में जहाज को जब्त करना अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत गंभीर विवाद का विषय बन सकता है। विभिन्न मानवाधिकार संगठनों और कई यूरोपीय नेताओं ने इजरायल की इस कार्रवाई पर चिंता जताई है।
इजरायल की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं
इस पूरी घटना पर इजरायली सरकार या सेना की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, अतीत में भी इजरायल ऐसे मानवीय काफिलों को रोकता रहा है, खासकर जब वे गाजा पट्टी की ओर रवाना होते हैं।
गाजा में मानवीय संकट गहराता जा रहा है
गाजा पट्टी में जारी संघर्ष और नाकेबंदी के चलते हजारों लोगों को भोजन, पानी और दवाओं की सख्त आवश्यकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से लगातार मानवीय राहत प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इजरायली अवरोध अक्सर इन पर अड़चन डालता है।
फ्रीडम फ्लोटिला का इतिहास
फ्रीडम फ्लोटिला कोएलिशन पहले भी गाजा की ओर मानवीय राहत लेकर जा चुका है। साल 2010 में ‘मावी मरमारा’ नामक जहाज पर इजरायली सेना के हमले में नौ कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी, जिससे वैश्विक आक्रोश फूटा था। तब से यह कोएलिशन लगातार गाजा के लिए राहत अभियान चलाता रहा है।
मानवाधिकार समूहों की मांग: तत्काल रिहाई
घटना के बाद विश्वभर के मानवाधिकार समूहों और कार्यकर्ताओं ने सवार लोगों की तत्काल रिहाई की मांग की है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी हस्तक्षेप की अपील की है ताकि इस प्रकार के मानवीय मिशनों को रोका न जा सके।
भारत की चुप्पी बनी चर्चा का विषय
जहां कई यूरोपीय देश इस पर बयान दे चुके हैं, वहीं भारत सरकार की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस बीच भारतीय सोशल मीडिया पर ग्रेटा थनबर्ग और इजरायल की कार्रवाई को लेकर तीखी बहस जारी है।
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