Delhidopeharnews ब्यूरो: आईआईटी बॉम्बे के बी.टेक छात्र साहिल वाकोडे की दुखद मृत्यु के बाद देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों पर बढ़ते दबाव को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। इस संवेदनशील मामले में अब आईआईटी दिल्ली के पूर्व निदेशक वी. रामगोपाल राव ने अपनी राय रखते हुए प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का बचाव किया है और शैक्षणिक सुधारों के लिए एक क्रांतिकारी प्रस्ताव पेश किया है।
प्रोफेसर डूला के समर्थन में पूर्व निदेशक
सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर प्रोफेसर डूला की आलोचनाओं के बीच, वी. रामगोपाल राव ने स्पष्ट किया है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों को निशाना बनाने के बजाय प्रणालीगत सुधारों पर ध्यान केंद्रित करना समय की मांग है।
5-वर्षीय B.Tech मॉडल का प्रस्ताव
आईआईटी दिल्ली के पूर्व निदेशक ने शैक्षणिक तनाव को कम करने के लिए एक ‘फ्लेक्सिबल’ मॉडल का सुझाव दिया है। उनके अनुसार, बी.टेक कार्यक्रम को पांच साल का कर देना चाहिए। इस मॉडल के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- जो छात्र अपनी गति से पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं, वे इसे पांच साल में पूरा कर सकें।
- मेधावी छात्र यदि आवश्यक क्रेडिट जल्दी पूरे कर लेते हैं, तो वे निर्धारित समय से पहले भी स्नातक हो सकते हैं।
- अतिरिक्त समय लेने वाले छात्रों को शैक्षणिक और भाषाई सहायता प्रदान की जाए, ताकि उन पर ‘फेल’ होने का कलंक न लगे।
शैक्षणिक दबाव को कम करने के लिए हमें अपनी शिक्षण पद्धति में लचीलापन लाना होगा। यदि कोई छात्र किसी विषय में संघर्ष कर रहा है, तो उसे अतिरिक्त समय और सहायता मिलना उसका अधिकार है, न कि उसकी असफलता।
मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य की राह
साहिल वाकोडे की घटना ने यह साबित कर दिया है कि केवल अकादमिक उत्कृष्टता ही पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम की आवश्यकता है। राव का यह सुझाव कि ‘देर से स्नातक होना’ कोई अपराध नहीं है, छात्रों के बीच से प्रतिस्पर्धा के उस डर को कम कर सकता है जो अक्सर अवसाद का कारण बनता है।