गुरुग्राम में अवैध पीजी और गेस्ट हाउस पर नकेल: मानवाधिकार आयोग ने डीटीसीपी से मांगी रिपोर्ट

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गुरुग्राम में अवैध पीजी और गेस्ट हाउस पर नकेल: मानवाधिकार आयोग ने डीटीसीपी से मांगी रिपोर्ट
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delhidopeharnews.com ब्यूरो: गुरुग्राम में तेजी से फल-फूल रहे अवैध पीजी (पेइंग गेस्ट) और गेस्ट हाउसों के संचालन पर अब हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपना लिया है। शहर के रिहायशी इलाकों में बिना किसी वैध अनुमति और सुरक्षा मानकों के चल रहे इन व्यावसायिक ठिकानों के कारण स्थानीय निवासियों को हो रही समस्याओं को संज्ञान में लेते हुए आयोग ने नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग (DTCP) को तलब किया है।

आयोग की सख्ती और निर्देश

मानवाधिकार आयोग ने स्पष्ट रूप से डीटीसीपी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे गुरुग्राम में संचालित सभी अवैध पीजी और गेस्ट हाउसों की विस्तृत सूची तैयार करें और अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा पेश करें। आयोग का मानना है कि रिहायशी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण न केवल बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है, बल्कि सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ी गंभीर चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं।

आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, तो विभाग को तत्काल प्रभाव से उन पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

मुख्य बिंदु और चिंताएं

  • शहर के पॉश सेक्टरों में बिना पंजीकरण के चल रहे पीजी।
  • अग्निशमन सुरक्षा मानकों (Fire Safety Norms) का घोर अभाव।
  • अवैध निर्माण के कारण सीवर और बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ।
  • स्थानीय निवासियों की निजता और सुरक्षा से जुड़ी शिकायतें।

आगे की राह

डीटीसीपी विभाग अब इन अवैध प्रतिष्ठानों के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, जिन पीजी संचालकों के पास वैध लाइसेंस या ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट नहीं है, उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे। प्रशासन का यह कदम उन हजारों छात्रों और कामकाजी युवाओं के लिए भी एक चेतावनी है जो असुरक्षित और अवैध आवासों में रहने को मजबूर हैं। अब देखना यह होगा कि क्या आयोग की इस सख्ती से गुरुग्राम की आवासीय कॉलोनियों को राहत मिल पाती है या नहीं।

मेरा परिचय।


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