कुब्बे गांव के गुरुद्वारा विवाद ने पकड़ा तूल, दो पक्षों में खूनी झड़प के बाद माहौल गरमाया

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कुब्बे गांव के गुरुद्वारा विवाद ने पकड़ा तूल, दो पक्षों में खूनी झड़प के बाद माहौल गरमाया
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Delhidopeharnews ग्राउंड रिपोर्ट: पंजाब के बरनाला जिले के भदौड़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कुब्बे गांव में गुरुद्वारा प्रबंधन को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गंभीर रूप ले चुका है। दोनों पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़प, पवित्र रेहरास साहिब के पाठ के दौरान कथित तौर पर खलल डालने, क्रॉस केस दर्ज होने और इसके बाद पैदा हुई राजनीतिक व धार्मिक सरगर्मी ने पूरे इलाके को संवेदनशील बना दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने ग्रामीण इलाकों में धार्मिक स्थलों के प्रबंधन और वर्चस्व की लड़ाई को एक बार फिर सतह पर ला दिया है, जिससे स्थानीय प्रशासन की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)

  • बरनाला जिले के कुब्बे गांव में गुरुद्वारे के प्रबंधन, ग्रंथि की नियुक्ति और चाबियों के नियंत्रण को लेकर दो पक्षों में लंबे समय से विवाद चल रहा है।
  • 29 सितंबर को सुबह करीब 11 बजे दोनों पक्षों के बीच गुरुद्वारा परिसर में तीखी झड़प हुई, जिसमें एक ग्रंथि समेत कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
  • पुलिस ने इस मामले में दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर क्रॉस-FIR दर्ज कर ली है, जिसमें कुल 27 से अधिक लोगों को नामजद किया गया है।
  • घटना का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है जिसमें रेहरास साहिब के पाठ के दौरान माइक खींचे जाने और हंगामे का दावा किया जा रहा है।
  • शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)

कुब्बे गांव का यह गुरुद्वारा विवाद अचानक पैदा नहीं हुआ, बल्कि पिछले कई महीनों से सुलग रहा था। यह पूरा विवाद मुख्य रूप से गुरुद्वारे की देखरेख, धार्मिक सेवाओं के संचालन, ग्रंथि की नियुक्ति और मुख्य चाबियों की कस्टडी को लेकर है। एक पक्ष का नेतृत्व केयरटेकर बाबा बूटा सिंह गुर्थारी कर रहे हैं, जो पिछले करीब 30 वर्षों से इस गुरुद्वारे में सेवा दे रहे हैं। वहीं, दूसरे पक्ष में गांव के ही कुछ स्थानीय निवासी शामिल हैं जो प्रबंधन व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं। तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब 21 सितंबर की एक कथित सीसीटीवी फुटेज सामने आई। इस फुटेज में एक महिला और कुछ अन्य लोग गुरुद्वारे के अंदर रेहरास साहिब के पाठ के दौरान ग्रंथि के सामने रखा माइक्रोफोन खींचते हुए नजर आ रहे हैं। इसके अलावा एक अन्य वीडियो में मंदिर या गुरुद्वारा परिसर के भीतर हाथापाई और धक्का-मुक्की साफ दिखाई दे रही है। इसके बाद 29 सितंबर को स्थिति तब और बिगड़ गई जब दोनों पक्षों के लोग गुरुद्वारे में आमने-सामने आ गए और उनके बीच जमकर मारपीट हुई। इस हिंसक झड़प में ग्रंथि और अन्य लोग घायल हो गए। शनिवार को बाबा बूटा सिंह के समर्थन में गांव में एक बड़ी बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें एसजीपीसी के कार्यकारी सदस्य और कई प्रमुख अकाली नेता शामिल हुए, जिससे यह मामला धार्मिक और राजनीतिक मंचों पर भी गरमा गया।

प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)

घटना की गंभीरता को देखते हुए बरनाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मोहम्मद सरफराज आलम ने तुरंत हस्तक्षेप किया। पुलिस प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कानूनी कदम उठाए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, धनौला पुलिस स्टेशन में एक पक्ष की शिकायत पर 12 नामजद और 3 अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसके अलावा, दूसरे पक्ष की शिकायत पर भी 15 लोगों के खिलाफ क्रॉस-केस दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच की जा रही है और सीसीटीवी फुटेज की तकनीकी जांच भी की जा रही है ताकि असल दोषियों की पहचान की जा सके। इस बीच, शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल और एसजीपीसी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धानी ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। एसजीपीसी प्रमुख ने आरोप लगाया है कि स्थानीय राजनेताओं के इशारे पर कुछ लोग गुरुद्वारा प्रबंधन में जबरन दखल दे रहे हैं।

बरनाला के एसएसपी मोहम्मद सरफराज आलम ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, ‘पुलिस दोनों पक्षों के संपर्क में है और एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं। इलाके में शांति बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों से अपील की गई है और कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह स्पष्ट किया जाता है कि यह गुरुद्वारा एसजीपीसी के सीधे नियंत्रण के अधीन नहीं है।’

आगे क्या? (What Lies Ahead)

कुब्बे गांव के इस गुरुद्वारे में फिलहाल पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। स्थानीय प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती दोनों पक्षों के बीच आपसी विश्वास को बहाल करना और शांति कायम रखना है। धार्मिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों की बढ़ती दखलंदाजी के कारण आने वाले दिनों में यह मुद्दा तूल पकड़ सकता है। प्रशासन की कोशिश है कि बातचीत के जरिए इस विवाद का कोई स्थायी समाधान निकाला जाए, जबकि पुलिस का जोर दोषियों को कानून के दायरे में लाने पर है। गांव के बुजुर्ग और समझदार लोग भी दोनों पक्षों को शांत करने के प्रयास में जुटे हैं ताकि धार्मिक स्थल की पवित्रता और गांव का सौहार्द बना रहे।

मेरा परिचय।


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