बॉलीवुड में एंटोरेज कल्चर पर फूटा दयालंद शेट्टी का गुस्सा, स्टार्स के महंगे शौक और पालतू जानवरों पर दिया बड़ा बयान

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बॉलीवुड में एंटोरेज कल्चर पर फूटा दयालंद शेट्टी का गुस्सा, स्टार्स के महंगे शौक और पालतू जानवरों पर दिया बड़ा बयान
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Delhidopeharnews ब्यूरो: मनोरंजन जगत में इन दिनों सितारों के महंगे शौक और उनके साथ आने वाले भारी-भरकम लवाजमे यानी एंटोरेज कल्चर को लेकर बहस छिड़ गई है। मशहूर अभिनेता दयानंद शेट्टी ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान इस बात पर तीखी प्रतिक्रिया दी है कि कैसे आजकल के फिल्मी सितारे सेट पर अपने पालतू जानवरों, नैनी और मेकअप आर्टिस्ट की फौज के साथ पहुंचते हैं। इस मुद्दे ने एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री के अंदरूनी कामकाज और बढ़ती लागत पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां मेकर्स को कलाकारों के इन फिजूलखर्ची वाले नखरे उठाने पड़ रहे हैं। दयानंद शेट्टी के इस बेबाक बयान ने सोशल मीडिया पर भी एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां दर्शक और फिल्म समीक्षक इस विषय पर खुलकर अपनी राय रख रहे हैं।

मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)

  • अभिनेता दयानंद शेट्टी ने बॉलीवुड सितारों की बढ़ती एंटोरेज संस्कृति की तीखी आलोचना की है।
  • सितारों द्वारा सेट पर पालतू जानवर, नैनी और अलग से मेकअप टीम लाने का चलन तेजी से बढ़ा है।
  • प्रसिद्ध फिल्म निर्माता प्रियदर्शन ने भी इस पर चिंता जताते हुए दक्षिण भारतीय सिनेमा की सादगी की मिसाल दी है।
  • इस तरह के महंगे खर्चों से फिल्मों के बजट पर भारी असर पड़ रहा है।

विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)

हाल ही में एक जाने-माने इंटरव्यू के दौरान, दयानंद शेट्टी ने खुलकर बात की कि कैसे भारतीय फिल्म उद्योग का परिदृश्य पिछले कुछ वर्षों में नाटकीय रूप से बदल गया है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर प्रकाश डाला कि आधुनिक अभिनेता सेट पर केवल अपनी कला के साथ नहीं आते, बल्कि उनके साथ एक पूरा काफिला होता है। इसमें कई बार उनके पालतू कुत्ते, उनके लिए खाना बनाने वाले शेफ, बच्चों की देखभाल करने वाली नैनी और पर्सनल स्टाइलिंग टीम शामिल होती है। दयानंद के अनुसार, इस प्रकार का अति-शानदार जीवनशैली प्रदर्शन शूटिंग के माहौल को तो प्रभावित करता ही है, साथ ही प्रोडक्शन हाउस के बजट पर भी अनावश्यक दबाव डालता है। उन्होंने इसे एक प्रकार का दिखावा करार दिया जो कलाकारों को उनकी असल जमीन से दूर कर रहा है।

इस बहस में केवल दयानंद शेट्टी ही अकेले नहीं हैं, बल्कि जाने-माने फिल्ममेकर प्रियदर्शन ने भी हाल ही में बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग की कार्यशैली के बीच एक स्पष्ट अंतर बताया है। प्रियदर्शन का मानना है कि दक्षिण भारत के कलाकार अपने काम के प्रति अधिक समर्पित और जमीन से जुड़े होते हैं। वे सेट पर बिना किसी तामझाम के समय पर पहुंचते हैं और अनावश्यक मांगें नहीं करते, जबकि बॉलीवुड में स्टारडम के नाम पर भारी-भरकम खर्चों को बढ़ावा दिया जा रहा है। एक फिल्म के निर्माण के दौरान जब अधिकांश बजट केवल कलाकारों के स्टाफ और उनके आलीशान कमरों या वैनिटी वैन पर खर्च होने लगे, तो रचनात्मकता और कहानी पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।

फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि आज के समय में कई बड़ी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर इसलिए भी असफल हो जाती हैं क्योंकि उनका शुरुआती बजट ही आसमान छू रहा होता है, जिसमें मुख्य रूप से इन बाहरी खर्चों का बड़ा हिस्सा होता है। दर्शक अब कंटेंट आधारित और वास्तविक कहानियों को पसंद कर रहे हैं, लेकिन स्टार्स के ये वीआईपी नखरे निर्माताओं के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस बात पर चर्चा हो रही है कि क्या बॉलीवुड को दक्षिण भारतीय सिनेमा की सादगी से कुछ सीखना चाहिए।

फिल्म निर्माण एक टीम वर्क है, लेकिन जब कलाकार अपनी व्यक्तिगत सुविधाओं और पालतू जानवरों को सेट पर प्राथमिकता देने लगते हैं, तो मूल काम यानी अभिनय और कहानी पीछे छूट जाती है। इस संस्कृति पर लगाम लगाने की सख्त जरूरत है ताकि फिल्में बेहतर बजट में बन सकें। – दयानंद शेट्टी, अभिनेता

भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)

दयानंद शेट्टी और प्रियदर्शन जैसी दिग्गज हस्तियों द्वारा उठाए गए ये कदम इस बात का संकेत हैं कि अब फिल्म उद्योग के अंदर से ही बदलाव की मांग उठने लगी है। आने वाले समय में, यदि निर्माताओं और कलाकारों ने इस एंटोरेज कल्चर पर लगाम नहीं लगाई, तो बढ़ती लागत और फ्लॉप फिल्मों का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आने वाले दिनों में बॉलीवुड सितारे अपने इन महंगे और दिखावटी शौकीनों से तौबा कर सिनेमा की गुणवत्ता पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं या नहीं। अंततः, दर्शकों का मनोरंजन ही सर्वोपरि है, और उसके लिए अनावश्यक तामझाम की नहीं, बल्कि सच्ची रचनात्मकता की आवश्यकता होती है।

मेरा परिचय।


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